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कैप्टन डोडो और जादुई चक्रव्यूह

एक दिन पास के गाँव में एक रहस्यमयी घटना घटित हुई। जंगल के किनारे, जहाँ पहले केवल सन्नाटा और पेड़ों की छाया थी, वहाँ एक ही रात में एक विशाल और अत्यंत जटिल  जादुई चक्रव्यूह  प्रकट हो गया। यह कोई साधारण संरचना नहीं थी — जो भी उसमें प्रवेश करता, वह फिर कभी वापस नहीं लौटा। धीरे-धीरे पूरे गाँव में भय फैल गया। यह मामला जल्द ही  कैप्टन डोडो  के कार्यालय तक पहुँचा। डायरेक्टर ने तुरंत एक आपात बैठक बुलाई। सभी अधिकारी मीटिंग रूम में एकत्र हुए। जब इस रहस्यमयी चक्रव्यूह के बारे में विस्तार से बताया गया, तो कैप्टन डोडो की आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। उन्हें महसूस हुआ कि यह रहस्य सुलझाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ डायरेक्टर से अनुमति माँगी कि वे स्वयं इस केस को संभालना चाहती हैं। डोडो की बुद्धिमत्ता, साहस और निर्णय-क्षमता से परिचित डायरेक्टर ने तुरंत उन्हें अनुमति दे दी। अपने विश्वसनीय साथी  कैप्टन पॉल  के साथ, कैप्टन डोडो इस खतरनाक यात्रा पर निकल पड़ीं। जैसे ही दोनों ने चक्रव्यूह की पहली प्राचीर पार की, प्रवेश द्वार अपने आप बंद हो गया। अब लौटने का कोई र...

कैप्टन डोडो और शैतान चूहें

  आज रविवार था छुट्टी का दिन, कामकाजी डोडो के लिए आराम का दिन तो डोडो भी आज बड़ी देर से उठी। आलस अभी भी उसकी आंँखों में दिख रहा था। उसने आती हुई उबासी को अपने एक हाथ से ढका और फिर एक अंगड़ाई लेकर बिस्तर से खड़ी हो गई। डोडो को कॉफी बहुत पसंद थी तो वो रसोई में गईं और कॉफी बनाने लगी, जब वो कॉफी बना रही थी तो उसके मन में कल का केस घूम रहा था, डोडो के सामने इस तरह का केस पहली बार आया था। केस कुछ यूँ था की डिफेंस मिनिस्ट्री ऑफिस में बहुत से चूहों ने धावा बोला दिया था और एक सीक्रेट जानकारी वाली चिप को चूहों ने कहीं अपने पास छुपा लिया था। अब इसमें दुविधा ये थी की चूहों को एक एक करके मार देते तो सीक्रेट चिप का पता कैसे लगता, इसलिए मिनिस्ट्री के ऑफिस को सील पैक कर दिया गया की एक भी चूहा बाहर न जा पाए। ये चूहे शायद दुश्मन देश ने भेजे होंगे इसी भ्रम के चलते ये केस सुलझाने के लिए डोडो के ऑफिस को सौपा गया था। डोडो भी ये सोच रही थी की वो इस में भले क्या ही कर लेगी, बड़ा ही अजीब सा केस था। कॉफी बन चुकी थी और डोडो बाहर लगे पौधों के गमलों के पास आकर सुबह की ताज़ा हवा में कॉफी पीने लगी तभी डोडो के मो...

कैप्टन डोडो और छिपकली

 कैप्टन डोडो ऑफिस का काम करके घर लौटी और थकान मिटाने के लिए सीधे जाकर अपने कमरे के बेड पर लेट गईं। आज का दिन काफी काम से भरा हुआ था। खुद का पूरा दिन वो अपने सामने घटते हुए देख सकती थी। पर आज का दिन काफी अच्छा भी था। आज ऑफिस स्टाफ डोडो की बहादुरी से काफी खुश था। सब लोग उसी की तारीफ कर रहे थे कि कैसे डोडो ने बड़ी चतुराई से मास्टरमाइंड टेररिस्ट टाइगर के प्लान को फेल कर दिया था और उसको पकड़ने में मदद की थी। थकी हुई डोडो बस ये ही सब दिन का हाल सोच रही थी की उसकी नज़र एकाएक उस छिपकली पर पड़ी जिसके पीछे आज सुबह वो झाड़ू लेकर भागी थी। उसे देखकर डोडो को अचंभा हुआ क्यूंँकि अभी वो छिपकली अपने पूरे परिवार के साथ वहाँ थी। डोडो को याद आया की आज सुबह सुबह इस छिपकली ने उसे कितना परेशान किया था, वो बाथरूम में जाती तो भी छिपकली पीछे आ जाती, वो रसोई में जाती तब भी वहाँ चली आती। एक तो सुबह की अफरा तफरी और ऊपर से छिपकली का नाटक। डोडो के मन में तो आ रहा था की वापस अभी झाड़ू से इसे यहांँ से भगा दूं पर थकी होने के कारण वो अभी भी बिस्तर पर लेटी रही। छिपकली डोडो को एकटक नज़र से देख रही थी और डोडो छिपकली को।...